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वरिष्ठ नागरिकों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

वरिष्ठ नागरिकों को अधिक कवरेज, फ्लेक्सिबिलिटी और सपॉर्ट की जरूरत होती है, इसलिए उन्हें एक ऐसा हेल्थ इंश्योरेंस चाहिए होता है जिसमें ढेर सारी सुविधाएं हों। हार्ट की समस्या, कैंसर, किडनी ट्रांसप्लांट जैसी गंभीर बीमारियों के लिए कोई सह-भुगतान शर्त नहीं होनी चाहिए। पॉलिसी में दी जाने वाले रूम सुविधा, ऊंचे दर्जे की होनी चाहिए। बिना किसी ऊपरी आयु सीमा प्रतिबन्ध के पॉलिसी को रिन्यू किया जा सकता हो, क्योंकि कुछ पॉलिसी में 70 साल की सीमा होती है, इसलिए ऐसी पॉलिसियों से बचेंने की कोशिश करें। हेल्थ इंश्योरेंस में एयर एम्बुलेंस सपॉर्ट, डे केयर कवर, ओपीडी कवर, जैसी सुविधाओं के रहने पर, वरिष्ठ नागरिक के लिए यह काफी मददगार साबित हो सकता है।

पहले से मौजूद बीमारियां या कष्ट
अधिकांश हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां, पहले से मौजूद बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति को कवरेज देने की इच्छुक नहीं होती हैं। पहले से मौजूद बीमारियों का मतलब है कि एक व्यक्ति एक HEALTH INSURANCE POLICY लेने से पहले से ही किसी बीमारी या कष्ट से पीड़ित है। इसमें कैंसर या डायबिटीज, हाई-ब्लड प्रेशर या अस्थमा जैसी बीमारियां शामिल हैं। पॉलिसी लेने से पहले से किसी बीमारी से पीड़ित होने पर वरिष्ठ नागरिकों को एक हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने में बड़ी कठिनाई होती है। लेकिन फिर भी ऐसी कई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियां हैं जो कवरेज दे सकती हैं यदि वह बीमारी बहुत गंभीर या आवधिक न हो। एक वरिष्ठ नागरिक के लिए एक हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदते समय, उनकी बीमारियों या शारीरिक कष्ट के बारे में अच्छी तरह जान लेना चाहिए ताकि क्लेम रिजेक्ट होने से बचा जा सके।

पॉलिसी के अंतर्गत बीमे की रकम

वरिष्ठ नागरिकों को जवान लोगों की तुलना में स्वास्थ्य सम्बन्धी जोखिम अधिक होने की संभावना रहती है। इसलिए, उनके लिए पर्याप्त कवरेज वाला हेल्थ इंश्योरेंस लेना बहुत जरूरी है। कुछ हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां, वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वीकृत अधिकतम हेल्थ कवरेज के लिए एक सीमा निर्धारित करती हैं। इसलिए वरिष्ठ नागरिकों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदते समय, सबसे पहले उनकी मौजूदा बीमारियों और भावी जोखिमों का पता लगाने की कोशिश करें ताकि उनके लिए आवश्यक सटीक हेल्थ कवरेज का पता लगाया जा सके।

हमेशा वही इंश्योरेंस प्लान लेने की कोशिश करें जो हेल्थ कवरेज को बढ़ाने की सुविधा प्रदान करता हो। हेल्थ इंश्योरेंस टॉप-अप जैसी सुविधाओं के बारे में जानना भी जरूरी है। क्योंकि यह वर्तमान उपलब्ध सीमा के अलावा अतिरिक्त कवरेज प्रदान करता है। यहां जानने लायक एक दिलचस्प बात यह है कि आप अपने वर्तमान नियोक्ता के साथ अपने इंश्योरेंस के लाभों को नौकरी बदलते समय अगले नियोक्ता के पास स्थानांतरित कर सकते हैं। बस नई नौकरी ज्वाइन करने से पहले इंश्योरेंस कंपनी को इसके बारे में सूचित करना पड़ता है ताकि आप बिना किसी प्रतीक्षा अवधि के उसी इंश्योरेंस कंपनी के साथ अपना इंश्योरेंस जारी रख सकें। क्योंकि जब आप एक नई कंपनी ज्वाइन करते हैं तब हेल्थ इंश्योरेंस प्राप्त करने के योग्य बनने से पहले आपको कुछ समय तक इंतजार करना पड़ता है। और इस प्रतीक्षा अवधि के दौरान भी आपके और आपके परिवार के लिए हेल्थ इंश्योरेंस बहुत जरूरी होता है।

फ्लोटर पॉलिसी बनाम व्यक्तिगत पॉलिसी
फ्लोटर पॉलिसी और व्यक्तिगत पॉलिसी में से किसी एक चुनने का फैसला करते समय आपको बहुत सावधान रहना चाहिए। फ्लोटर पॉलिसी के अंतर्गत, सबसे ज्यादा उम्र वाले सदस्य की उम्र के आधार पर प्रीमियम निर्धारित किया जाता है। किसी भी बीमित सदस्य द्वारा फ्लोटर पॉलिसी के अंतर्गत इंश्योरेंस का क्लेम किए जाने के बाद, उस पॉलिसी के अंतर्गत प्रदान किए जाने वाले कवरेज की रकम उस हद घट जाती है और शेष सदस्यों को निकाली गई रकम तक स्वास्थ्य जोखिम का सामना करना पड़ता है।

वरिष्ठ नागरिकों के बीमार पड़ने की ज्यादा संभावना रहती है, इसलिए उन्हें एक साल में कई बार हेल्थ इंश्योरेंस की मदद की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए, वरिष्ठ नागरिकों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय फ्लोटर पॉलिसी के बजाय व्यक्तिगत हेल्थ इंश्योरेंस लेना चाहिए।

प्रतीक्षा अवधि के बारे में जान लें
प्रतीक्षा अवधि, बीमित व्यक्ति को एक निश्चित समयावधि तक, ख़ास तौर पर पहले से मौजूद बीमारियों के मामले में, जोखिम का कवरेज पाने से रोके रखती है। प्रतीक्षा अवधि समाप्त होने के बाद, बीमित व्यक्ति, आवश्यक इंश्योरेंस कवरेज पाने के योग्य बन जाता है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए पहले से मौजूद बीमारियों के लिए प्रतीक्षा अवधि, 1 से 4 साल तक की होती है। इसलिए, वरिष्ठ नागरिकों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदते समय, ऐसी पॉलिसी लेने की कोशिश करें जिसमें पहले से मौजूद बीमारियों के लिए प्रतीक्षा अवधि, सबसे कम हो।

वरिष्ठ नागरिकों को घुटने बदलवाने, प्रोस्टेट संबंधी बीमारी इत्यादि जैसी समस्याओं के इलाज की जरूरत पड़ सकती है लेकिन इंश्योरेंस कंपनियां आम तौर पर एक निश्चित प्रतीक्षा अवधि के बाद ही ऐसी समस्याओं के इलाज का पैसा देती हैं। इसलिए आपको कम से कम प्रतीक्षा अवधि के साथ अधिक से अधिक जोखिम कवरेज देने वाली हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेनी चाहिए।

यदि आप सीधे किसी इंश्योरेंस कंपनी से वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ले रहे हैं तो आपको बहुत ज्यादा प्रीमियम देना पड़ सकता है, साथ में सह-भुगतान की शर्त हो सकती है, पहले से मौजूद बीमारियों के लिए प्रतीक्षा अवधि की शर्त भी हो सकती है और आपको कुछ मेडिकल चेकअप भी करवाने पड़ सकते हैं। कई बैंक अपने ग्राहकों को विशेष पॉलिसी प्रदान करने के लिए विशिष्ट हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के साथ गठबंधन करके रखते हैं। ऐसी पॉलिसी, ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम के अंतर्गत आती है, इसलिए प्रीमियम काफी कम होता है। आपको लंबी प्रतीक्षा अवधि के बिना और पहले से मौजूद बीमारियों के साथ भी हेल्थ इंश्योरेंस मिलता है।

Source: Navbharat Times

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